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नवरात्रि विशेष: शीघ्र विवाह हेतु तंत्रोक्त साधना

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विवाह में विलंब एक गंभीर समस्या हो सकती है, जिसके पीछे ग्रह दोष या अन्य नकारात्मक ऊर्जाएँ हो सकती हैं। नवरात्रि के नौ दिन देवी के नौ रूपों की आराधना के लिए सर्वश्रेष्ठ हैं। यह विशेष उपाय विशेष रूप से माता कात्यायनी को समर्पित है, जो विवाह की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं।

आवश्यक सामग्री:

  1. माता कात्यायनी की प्रतिमा या चित्र
  2. लौंग: 21 अखंडित (टूटी हुई न हों)
  3. हरी इलायची: 21 अखंडित
  4. देशी घी का दीपक
  5. लाल रंग का आसन और वस्त्र
  6. सिंदूर और लाल फूल (गुलाब)
  7. एक मिट्टी का कलश

यह साधना नवरात्रि के किसी भी दिन शुरू की जा सकती है, किंतु पंचमी तिथि को शुरू करना अति उत्तम है।

1. पवित्रीकरण और संकल्प: ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर लाल वस्त्र धारण करें। अपने घर के मंदिर में या किसी शांत कक्ष में लाल आसन बिछाकर बैठ जाएँ। उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करें। एक ताम्र पात्र में जल लेकर अपने ऊपर और पूजा सामग्री पर छिड़कें। अब अपने दाहिने हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर संकल्प लें कि आप विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए यह साधना कर रहे हैं।

2. देवी पूजन और मंत्र: माता कात्यायनी की प्रतिमा को स्थापित करें। उन्हें सिंदूर का तिलक लगाएँ, लाल फूल अर्पित करें और घी का दीपक जलाएँ। माता से विवाह हेतु प्रार्थना करें। इसके पश्चात, मंत्र का जाप करें:

3. लौंग-इलायची का विशेष प्रयोग: यह इस साधना का सबसे महत्वपूर्ण भाग है। 21 लौंग और 21 इलायची को एक साथ मिलाकर रखें। प्रत्येक माला जाप के बाद, एक-एक लौंग और इलायची के जोड़े को माता के चरणों में अर्पित करें। इस प्रकार 5 माला के अंत तक आप सारे लौंग-इलायची अर्पित कर देंगे।

4. विशेष अर्घ्य: नवरात्रि के अंतिम दिन (नवमी या दशमी), इन अर्पित की गई लौंग और इलायची को उठा लें। इन्हें पीसकर एक चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को एक छोटे से लाल कपड़े में बांधकर अपने तकिये के नीचे रखें।

5. विशेष विसर्जन: दशमी तिथि को, उस लाल कपड़े को लेकर किसी बहते हुए जल (नदी) में प्रवाहित कर दें। प्रवाहित करते समय देवी से शीघ्र विवाह की अंतिम प्रार्थना करें।

यह विधि अत्यंत गहन और निष्ठा की मांग करती है। इसमें धैर्य और विश्वास का होना आवश्यक है। इस तंत्रोक्त विधि से विवाह की बाधाएं दूर होती हैं।

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