ग्रहण का सूतक क्या है और क्यों मानना चाहिए?

सूतक का अर्थ है – ‘अशुद्धि का समय’। जब कोई ग्रहण लगता है, तो पृथ्वी के वायुमंडल में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, ग्रहण के समय राहु और केतु सूर्य या चंद्रमा को ग्रसित करते हैं, जिससे ब्रह्मांड में एक अशांति उत्पन्न होती है।

वैज्ञानिक और आध्यात्मिक कारण:

  • नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव: ग्रहण के समय कीटाणुओं की सक्रियता बहुत अधिक बढ़ जाती है। भोजन और पानी में अशुद्धि आ जाती है।
  • मानसिक शांति: सूतक काल में व्यक्ति को अपनी इंद्रियों को संयमित रखकर ईश्वर का ध्यान करना चाहिए, ताकि वातावरण में मौजूद नकारात्मकता का प्रभाव उसके मन और आत्मा पर न पड़े।
  • सूक्ष्म ऊर्जा की कमी: ग्रहण के दौरान वातावरण की सूक्ष्म ऊर्जा (सूक्ष्म प्राणशक्ति) क्षीण हो जाती है, इसलिए इस समय कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता।

2. चंद्र ग्रहण में सूतक कितने घंटे पहले लगता है?

सूतक काल का समय सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के लिए अलग-अलग होता है। चंद्र ग्रहण में सूतक का नियम इस प्रकार है:

नियम: चंद्र ग्रहण प्रारंभ होने से ठीक 9 घंटे पहले सूतक काल लग जाता है।

उदाहरण के लिए: यदि चंद्र ग्रहण शाम को 7:00 बजे शुरू हो रहा है, तो उसी दिन सुबह 10:00 बजे से सूतक काल प्रभावी हो जाएगा।


3. सूतक काल के नियम: क्या करें और क्या न करें?

सूतक काल के दौरान कुछ कार्यों को वर्जित माना गया है ताकि हम नकारात्मक ऊर्जा से बच सकें।

क्या न करें (वर्जित कार्य):

  1. भोजन पकाना और करना: सूतक लगते ही भोजन बनाना और खाना वर्जित है। मान्यता है कि इस समय भोजन करने से बीमारियाँ हो सकती हैं और पाप लगता है।
  2. पूजा-पाठ: सूतक में मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। मूर्तियों को स्पर्श करना वर्जित है।
  3. सोना: सूतक काल में विशेषकर बुजुर्गों, बच्चों और बीमारों को छोड़कर किसी को भी नहीं सोना चाहिए।
  4. शुभ कार्य: विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे किसी भी नए कार्य की शुरुआत नहीं करनी चाहिए।
  5. गर्भवती महिलाएँ: गर्भवती महिलाओं को सूतक और ग्रहण के दौरान घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए और न ही धारदार वस्तुओं (चाकू, कैंची) का उपयोग करना चाहिए।

क्या करें (पूजा-विधि और उपाय):

  1. नाम जप: सूतक और ग्रहण के समय इष्टदेव का मानसिक जाप करना सबसे उत्तम है।
  2. ध्यान और मंत्र: रामायण, गीता का पाठ करें या ‘ॐ नमः शिवाय’ अथवा महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। इससे नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है।
  3. भोजन की सुरक्षा: सूतक से पहले ही खाने-पीने की वस्तुओं में तुलसी के पत्ते डाल दें। तुलसी में नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करने की अद्भुत शक्ति होती है।

4. यदि सूतक में पूजा कर ली या खाना खा लिया तो क्या होगा?

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यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण प्रश्न है। यदि अज्ञानतावश या भूलवश सूतक काल में भोजन कर लिया जाए या पूजा कर ली जाए, तो ज्योतिषीय और धार्मिक दृष्टि से इसके परिणाम इस प्रकार हो सकते हैं:

  • स्वास्थ्य पर प्रभाव: ज्योतिषीय दृष्टि से, ग्रहण के समय भोजन करने से पेट से संबंधित रोग हो सकते हैं क्योंकि नकारात्मक ऊर्जा भोजन के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर जाती है।
  • आध्यात्मिक हानि: सूतक काल में हर मनुष्य को मानसिक और शारीरिक रूप से अशुद्ध माना जाता है। चूँकि स्वयं व्यक्ति अशुद्ध है, इसलिए इस समय की गई पूजा-पाठ का फल उसे प्राप्त नहीं होता है।
  • प्रायश्चित: यदि ऐसा हो जाए, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। ग्रहण समाप्त होने के बाद पूरे घर में गंगाजल छिड़क कर शुद्धिकरण करें। स्वयं स्नान करें और यथाशक्ति दान-पुण्य करें। ईश्वर से भूल की क्षमा मांगें।

लेखक: astrologer atul tripathi

This Post Has 2 Comments

  1. Kavita patel

    Aapki har jankari meri bat ashi ke liye bahut hi satik hoti he…aapne jo jo bhi bhavishya vani ki he usi ke according huwa bhi he ….Mera vishvas any channel or astrologers se adhik atulji pe he .. dhanyawad.

  2. Kavita patel

    Aapki har jankari meri rashi ke liye bahut hi satik hoti he…aapne jo jo bhi bhavishya vani ki he usi ke according huwa bhi he ….Mera vishvas any channel or astrologers se adhik atulji pe he .. dhanyawad.

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